बीवी को बदलकर लिया चुदाई का मजा

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प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, आप सभी कामुकता डॉट कॉम के पढ़ने वालों को में सबसे पहले बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ, क्योंकि आप सभी के प्यार की वजह से हम जैसे लोगों को अपनी आप बीती कोई सच्ची घटना कोई भी ऐसा काम बताने की हिम्मत मिलती है। मैंने अब तक बहुत सारी सच्ची घटनाओं पर आधारित घटनाओं को पढ़कर उनके मज़े लिए और इसलिए आज में भी अपनी एक सच्ची कहानी आप लोगों को सुना रहा हूँ, जो सबसे अलग हटकर है और  जिसमें मैंने अपनी पत्नी की जगह दूसरे की पत्नी की अदला-बदली करके उसकी चुदाई के मज़े लिए, लेकिन वो सब कुछ मैंने कैसे किया? अब आप उसको पूरे विस्तार से सुने और आगे पढ़े। में उम्मीद करता हूँ कि यह आपको सभी को जरुर पसंद आएगी और आप इसका पूरा मज़ा ले सकते है।

दोस्तों में 56 साल का और मेरी पत्नी 53 साल की है, मेरा नाम ललित और मेरी पत्नी का नाम सुशीला है, मेरी लम्बाई 5.5 वजन 75 किलो और मेरी पत्नी की लम्बाई 4.9 और उसका वजन 60 किलो है। हमारी शादी हुए 32 साल हो गये है, हमारे दो बेटे है जो बाहर रहते है और उनकी भी शादी हो गई है। मेरी पत्नी चेहरे से गोरी और थोड़ी सी मोटी है, उसके फिगर का आकार 38-40-42 है। वैसे में भी मोटा हूँ और मेरी छाती 42 कमर 40 है, लंड छोटा करीब 4.4 लम्बाई और मोटाई 1.5 है। दोस्तों हमारे बेटों के बाहर चले जाने के बाद हम दोनों पति, पत्नी अकेले हो गये थे, जिसकी वजह से हम दोनों को हमारी सेक्स लाईफ अब बहुत ज्यादा बोर लगने लगी थी, में कभी कभी मजाक में सुशीला को बोलता था कि तुम्हारी लम्बाई बहुत छोटी है, इसलिए मुझे वैसा मज़ा नहीं आता जैसा आना चाहिए, तुम्हारी लम्बाई कम से कम 5 फीट तो होनी चाहिए और फिर में उसको ताना मारता कि तुम्हारी जोड़ी तो मेरे दोस्त नरेन्द्र से मिलती है, जिसकी लम्बाई मुश्किल से 5 फीट से ज़्यादा थी, कुछ दिन तो वो मेरी सभी बातें चुपचाप सुनती रही, लेकिन एक रोज वो भी मुझे ताना मारते हुए मुझसे बोली कि आपकी जोड़ी भी सरिता से मिलती है, यानी नरेन्द्र कि पत्नी जो 5 फिट से ज़्यादा लंबी थी, यह बात उसने तब कही जब में एक रात को अपना लंड उसकी चूत में डालकर लगातार धक्के देकर उसकी चुदाई कर रहा था और उसके मुहं से यह बात सुनते ही मुझे सबसे पहले एक अजीब सा झटका लगा कि आज मेरी पत्नी मुझसे यह कैसी बातें कर रही है, क्या यह पागल हो चुकी है, लेकिन फिर में मन ही मन सोचने लगा कि आज मेरे नीचे लेटी मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर मुझसे जो अपनी चुदाई करवा रही है, वो मेरी पत्नी सुशीला नहीं नरेन्द्र की पत्नी सरिता है और उसको सोचकर मुझे चुदाई करने में ज्यादा मज़ा आने लगा और उस समय सुशीला मुझे बहुत अच्छी लगने लगी थी, में बहुत कस कसकर धक्के देकर चुदाई करने लगा और अब वो मुझसे कहने लगी वाह आज तो मुझे चुदाई करवाने में बहुत मज़ा आ रहा है और जब हम दोनों झड़कर चुदाई से फ्री हो गये तो हमे लगने लगा कि दूसरे को मन ही मन सोचकर चुदाई करने में बहुत मज़ा आता है। उसके बाद से जब भी में अपनी पत्नी को चोदता तो उस समय मेरा शरीर मेरी पत्नी के साथ होता, लेकिन मेरी सोच में बस सरिता होती और उसको समझकर में अपनी पत्नी को बहुत जमकर चोदता और वो भी मेरी चुदाई से बहुत ज्यादा चकित हुआ करती, चुदाई के बाद वो मुझसे मेरे उस जोश के राज बहुत बार जानने की कोशिश करती थी, लेकिन में उसकी बात को टाल दिया करता था। फिर एक दिन किस्मत से मेरा दोस्त नरेन्द्र और उसकी पत्नी सरिता एक दिन हमसे मिलने हमारे घर पर आ गए तो उनको देखकर हम दोनों को मन ही मन लगा कि हम जिस घड़ी का इतने समय से इंतज़ार कर रहे थे और वो घड़ी आज आ गई है, इस बात को मन में सोचकर हम दोनों बहुत खुश थे, हम सभी लोगों ने साथ में बैठकर खाना खाया और उसके बाद हम सभी हॉल में एक साथ बैठकर बातें हंसी मजाक करने लगे। दोस्तों बातें करते करते मेरी नज़र सरिता पर जमने लगी और में उसके गोरे सेक्सी बदन को घूर घूरकर देखने लगा, वो दिखने में बहुत ही सुंदर उसका वो आकर्षक बदन मुझे अपनी तरफ खीँच रहा था। उसके बड़े आकार के बूब्स गोल मटोल गांड को देखकर में पागल हो चुका था और अब मेरी पत्नी सुशीला की नज़रे भी नरेन्द्र के गठीले शरीर पर ठहर गई, वो भी उसके अंदर अपने लायक वो सब देखने लगी जो उसके काम का था। तभी मैंने मौका देखकर नरेन्द्र से कहा कि यार मेरी पत्नी सुशीला कद में बहुत छोटी है, इसलिए मेरी इससे इतनी जोड़ी नहीं मिलती और फिर मेरी बात को वहीं पर काटते हुए सरिता तुरंत कहने लगी कि यह सब तो चलता ही है, आप भी देखो में भी कितनी लंबी पूरी हूँ और मेरे पति कितने छोटे है, लेकिन अब हम लोग इस समस्या का क्या करें? आप भी देखिए ना मेरी जोड़ी तुमसे मिलती है और इनकी जोड़ी सुशीला से। अब नरेन्द्र बोला कि छोटा बड़ा होने से क्या होता है? यह सब बेकार की बातें है, में इन बातों को नहीं मानता और मेरा मानना तो यह है कि बस चुदाई करने के लिए लंड बड़े आकार का होना चाहिए, मेरा लंड तो पूरा 6 इंच का है, क्यों तुम्हारा लंड है क्या इतना बड़ा? तो सुशीला बोली कि नहीं इनका इतना बड़ा नहीं, थोड़ा छोटा है। दोस्तों इस तरह एक दूसरे से खुलकर बहस बाज़ी करने से हम सभी धीरे धीरे हॉट होने लगे थे। तभी मैंने मौके का फायदा उठाकर कहा कि आज तो हमारी अदला बदली हो जाए और देखते है कि किसको किसके साथ कितना मज़ा आता है और मुझे लगा कि नरेन्द्र को मेरी यह बात जम गई, वो भी मेरी बात से सहमत होने वाला था, लेकिन अभी तक मुझे उसकी तरफ से कोई भी जवाब नहीं मिला था और अब हम दोनों खड़े हो गये, में अपनी जगह से उठकर सरिता के पास जाकर उससे एकदम चिपककर बैठ गया और मुझे यह सब करते देखकर नरेन्द्र भी उठकर मेरी पत्नी सुशीला के पास चला गया और वो भी उसके पास बैठ गया।

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दोस्तों सरिता आकार में लंबी, गोरी भूरी, सुंदर गोल चेहरा, बड़ी बड़ी काली आखें, लंबे काले बाल और भरे हुए शरीर की मालकिन थी, उसका वजन करीब 66 किलो और उसके बूब्स का आकार 38-36-42 था। उसको देखकर किसी का भी लंड पानी छोड़ दे और उसकी चुदाई करने के लिए हर कोई तैयार हो जाए। उसको कई बार चोदकर भी उसका मन ना भरे वो उसको चोदता ही रहे। अब मैंने उसकी पीठ पर अपना एक हाथ रख दिया और फिर अपने हाथ को नीचे सरकाकर कमर तक पहुंचा दिया और समय खराब ना करते हुए तुरंत उसकी गोरी कमर को पकड़कर उसको अपनी तरफ खींच लिया, उस अचानक दिए झटके की वजह से उसके गोल मुलायम बूब्स मेरी छाती से लग गए और मैंने उसे किस किया, सबसे पहले हाथों पर, फिर गाल होंठो पर। उसके बाद मैंने उसके होंठो को चूसना शुरू किया और फिर कपड़ो के ऊपर से ही उसके बूब्स को मसलना, सहलाना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से वो बहुत ही जल्दी से गरम हो गई और अब वो मेरे गले में अपनी बाहें डालकर मुझसे ज़ोर से चिपकने लगी। मैंने एक झटका देकर उसकी साड़ी को पकड़कर खींच दिया, जिसकी वजह से अब उसका ब्लाउज मेरे सामने आ गया और मैंने जल्दी से ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए, जिसकी वजह से अब उसकी ब्रा में उसके बूब्स नज़र आने लगे थे। मैंने ब्लाउज को पीछे की तरफ उतारकर खोल दिया और ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को मसलने और उनका रस निचोड़ने लगा, उसकी दोनों आँखे बंद थी और वो आह्ह्ह वाह मुझे बहुत मज़ा आ रहा है हाँ और ज़ोर से दबाव ऊईईईइ हाँ आज तुम इनका पूरा रस निचोड़ दो उफफ्फ्फ्फ़ कर रही थी। अब मैंने उसे खड़ा करके उसकी साड़ी को पूरा खोल दिया और ब्रा का हुक खोलकर ब्रा को नीचे फेंक दिया, जिसकी वजह से वो अब मेरे सामने सिर्फ़ पेटिकोट में खड़ी हुई थी, मेरी नजर उसके कपड़ो के अंदर छुपी सुन्दरता को देखकर बहुत चकित थी, क्योंकि वो अंदर से ऐसी होगी मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। फिर मैंने अपने दूसरी तरफ देखा कि नरेन्द्र भी अब एकदम पूरा नंगा होकर खड़ा हुआ था, शायद उसको भी हम दोनों को देखकर जोश आने लगा था और सुशीला जो उसके सामने पेटिकोट में थी, वो उसके बड़े बड़े बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूस रहा था, उसका लंड एकदम तना हुआ था और सुशीला उसके लंड को अपने एक हाथ में लेकर धीरे धीरे हिलाते हुए मस्त हुई जा रही थी। उस समय वो दोनों भी पूरे गरम हो चुके थे और उनको भी किसी से कोई मतलब नहीं था, बस चुदाई करने के लिए व्याकुल थे। फिर जब मैंने यह नज़ारा देखा तो में भी एकदम से पहले से ज्यादा गरम हो गया और मेरा लंड भी अब मेरी पेंट में तनकर खड़ा हो चुका था और अब वो हिलोरे लेने लगा था, इसलिए मैंने जल्दी से अपने सभी कपड़े उतारकर में पूरा नंगा हो गया और सरिता के बूब्स को पूरे जोश में आकर बहुत ज़ोर से दबाते हुए मुहं में भरकर चूसने लगा, जिसकी वजह से सरिता भी जोश में आकर बहुत मस्त हो रही थी और वो अपने एक हाथ में मेरा लंड पकड़कर ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी थी। अब में सरिता को अपनी बाहों में भरकर बेडरूम में लेकर चला गया और मैंने उसको तुरंत डबल बेड पर लेटा दिया और एक बेड को खीँचकर अलग कर लिया और अब मैंने उसके पास में बैठकर उसके बूब्स को अपने मुहं में भर लिया और उसने जोश में आकर बहुत मस्त होकर अपनी दोनों आँखे बंद कर ली और मज़े लेने लगी थी और मैंने देखा कि कुछ देर बाद नरेन्द्र भी सुशीला को बेडरूम में लेकर आ गया और वो दोनों दूसरे बेड पर चले गये, सुशीला ने इतना मस्त लंड देखा तो वो मस्त होकर बेड के नीचे आकर अपने दोनों घुटनों पर बैठकर वो नरेन्द्र के लंड की चमड़ी को हटाकर सुपाड़े को अपने मुहं में लेकर चाटने चूसने लगी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर में भी यह सब देखकर बहुत मस्त हो गया और में धीरे धीरे अपने मुहं को नीचे ले आया, सबसे पहले में उसकी नाभि में अपनी जीभ को डालकर घुमाने लगा और फिर कुछ देर बाद में उसकी गीली जोश से भरी चूत के दाने को अपनी जीभ से चाटने लगा और दाने पर अपनी जीभ को छूते ही सरिता के बदन ने जैसे बिजली का झटका खाया और वो ज़ोर से मेरा सर पकड़कर मेरा मुहं अपनी चूत पर दबाने लगी, वो जोश में आकर ज़ोर से आगे पीछे होने लगी थी और मुहं से आवाज़ निकाल रही थी आह्ह्हह्ह्ह्हहह हाँ और उउर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर प्यार से चाटो वाह आज तो मज़ा आ गया, मुझे ऐसा मज़ा कभी नहीं आया था। अब मैंने उसकी चूत की पंखुड़ियों को अपने एक हाथ  की उँगलियों से खोलते हुए अपनी जीभ को उसकी खुली हुई चूत की दीवारों में डाल दिया और अब में उसकी चूत को अपनी जीभ से ही चोदने लगा था और उधर नरेन्द्र की आवाज़ आ रही थी, उफ्फ्फ्फ़ हाँ सुशीला रानी हाँ थोड़ा और ज़ोर से चूसो, हाँ इसको पूरा अपने मुहं में ले लो आह्ह्ह्ह मुझे बहुत मज़ा आ रहा है, ऐसा मज़ा मुझे कभी नहीं आया और उसकी यह बातें सुनकर मेरा लंड अब आपे से बाहर हो रहा था। तभी सरिता बोली ओहह्ह्हह आईईईइ अब में गई काम से, में अब झड़ने वाली हूँ और इतना कहते हुए ही उसकी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया, मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरे मुहं में रस भर गया हो और में उसकी चूत को आखरी बूँद तक चाटता रहा। दोस्तों अब मेरी बारी थी। मैंने सुमन के दोनों पैरों को फैला दिया और में उसके पैरों के बीच में आ गया और अब उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखकर मैंने अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के मुहं पर रखकर एक ज़ोर से धक्का मार दिया, जिसकी वजह से उसकी चूत तो पहले ही पानी से चिकनी थी तो लंड को अंदर डालते ही चूत में पूरा चला गया और और उसकी चूत के तले से जाकर टकरा गया, जिसकी वजह से सुमन के मुहं से एक आह्ह्हह्ह्ह्ह निकली तो मैंने लंड को पूरा बाहर खींचा और एक बार फिर ज़ोर से धक्का मार दिया, वो मस्ती से सिसकी भरती हुई आवाज़े निकालने लगी, आहहह्ह्ह्ह वाह क्या बताऊँ बहुत मज़ा आ रहा है। फिर में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा और सरिता मुझसे बोलने लगी हाँ और ज़ोर से चोदो मुझे मेरे राजा, फाड़ दो मेरी चूत को आज आईईईईई ओहहहह में गई में गई और इस तरह से आनंद लेते हुए उसकी चूत ने एक बार फिर से उसकी चूत से पानी छोड़ते हुए मेरे लंड का अभिषेक कर दिया। में और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा, मुझे तब ऐसा लगा कि दुनिया की सारी मस्ती सारा जोश मेरे लंड में आ गया है और में उुउउर आह्ह्ह्ह करते हुए मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी और उसकी सारी चूत मेरे वीर्य से भर गई और उसने मस्त होकर अपनी आखें मूंद ली। कुछ देर में उसके ऊपर ऐसे ही लेटा रहा और फिर कुछ देर बाद हम दोनों एक दूसरे से अलग हो गये।

अब उधर नरेन्द्र भी सुशीला की मस्ती से चुदाई किए जा रहा था, वो दोनों बहुत जोश में थे और मुझे सुशीला का चेहरा देखकर अंदाजा लग रहा था कि उसको नरेन्द्र के लंबे मोटे लंड से अपनी चूत की चुदाई करवाने में बहुत मज़ा आ रहा था, वो अहह्ह्ह ऊहहहह हाँ जाने दो पूरा अंदर हाँ ज़ोर से धक्के दो वाह मज़ा आ गया कि आवाज़ निकाल रही थी और वो कह रही थी कि उसको अपनी चुदाई करवाने में आज जैसा मज़ा कभी नहीं आया हाँ किए जाओ और भी दम लगाकर तुम अपना काम किए जाओ और आज तुम मेरी चूत को भी फाड़ दो और ज़ोर से ओह्ह्ह्ह में अब झड़ने वाली हूँ आह्ह्ह्ह ऊहह्ह्ह करके उसने अपनी चूत के पानी से नरेन्द्र के लंड को नहला दिया, अब नरेन्द्र ज़ोर ज़ोर से फका फक धक्के देकर उसकी चुदाई किए जा रहा था। तभी अचानक से उसके धक्को की स्पीड बढ़ गई और ओह्ह्ह्ह कहते हुए उसके लंड ने सुशीला की चूत में फव्वारा छोड़ दिया। उसके बाद सुशीला ने मदहोशी में आकर अपनी दोनों आँखे मूंद ली, वो उसकी चुदाई से पूरी संतुष्ट नजर आ रही थी और अब शायद वो इतनी देर चली उस चुदाई की वजह से थोड़ा सा थककर आराम भी करने लगी थी।

दोस्तों इस तरह हमारा चुदाई का यह सिलसिला ऐसे ही बहुत दिनों तक लगातार चलता रहा और हमने अपनी अदला-बदली करके चुदाई के पूरे पूरे मज़े लिए और उस चुदाई के बाद हम सभी बहुत खुश थे, क्योंकि अब हमारी जोड़ियाँ बनकर पूरी हो चुकी थी और हमें अपनी अपनी मर्जी की चूत और लंड मिल चुका था, क्योंकि यह बात यहीं से उठी थी और यहीं से खत्म हो गई। शरीर की लम्बाई तो एक बहाना था हमे जो चाहिए था वो सब आज हमारे पास था ।।

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धन्यवाद …

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