चूत चुदवाकर गांड की बलि देनी पड़ी

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प्रेषक : उर्मिला …

हैल्लो दोस्तों आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों के मज़े लेने वालो के लिए अपने जीवन की एक सच्ची घटना को लेकर आई हूँ। दोस्तों जब यह घटना मेरे साथ घटी तब मुझे सेक्स का इतना अनुभव नहीं था, लेकिन पहली बार सेक्स करने मुझे बड़ा मस्त मज़ा आया और उसके बाद मेरी सोच के साथ साथ मेरा यह जीवन भी बिल्कुल बदल गया और अब में वो मज़े लेकर खुश रहती हूँ। दोस्तों आप सभी को ज्यादा बोर ना करते हुए में सीधे अपनी आज की कहानी की तरह आती हूँ। दोस्तों यह बात आज से दो साल पहले की है, तब में 12th क्लास में पढ़ती थी और मेरी उम्र 18 साल थी और मेरी लम्बाई 5.1 इंच थी। दोस्तों मेरा गोरा बदन बड़ा ही नाज़ुक था और मेरे बदन का आकार 33-26-34 था। मेरी चढ़ती जवानी की वजह से मेरे बूब्स का आकार जरुर छोटा था, लेकिन मेरे बूब्स की निप्पल हमेशा खड़ी रहती थी। मेरे बाल बहुत लंबे और काले घने थे और मेरा यह रूप देखकर हर कोई मेरी तरफ आकर्षित हुआ करता था, क्योंकि मेरे शरीर को बनाने में भगवान ने अपनी तरफ से कोई भी कमी नहीं छोड़ी थी। दोस्तों इस बात से में हमेशा बहुत खुश रहती थी, मेरी एक बड़ी बहन थी जिसकी शादी दो साल पहले हो चुकी थी और अब में अपने माँ बाप के साथ अकेली लड़की थी।

दोस्तों मम्मी पापा के अलावा हमारे साथ मेरी दादी भी रहती थी और हम सभी लोग हमारे मकान की पहली मंजिल पर रहते थे और नीचे की मंजिल पर दो किराएदार रहते थे। दोस्तों नीचे की मंजिल पर एक टीचर भी रहते थे जिनका नाम “शिवम मिश्रा” था और उनके पास में भी ट्यूशन पढ़ती थी, उनकी उम्र करीब 32-33 साल के थे और उनके दो बच्चे और बीवी भी साथ रहती थी। दोस्तों शिवम जी की में बहुत इज्जत करती थी और कभी मैंने सोचा भी नहीं था वो मेरी पहली बार चुदाई करेंगे। वैसे स्कूल में बहुत लड़के मुझे लाइन मारते थे, लेकिन में बहुत डरती थी। मेरी एक सहेली थी जिसका नाम “निशा” था और निशा को उसके पड़ोस में रहने वाला लड़का कई बार चोद चुका था और वो मुझे अपनी चुदाई उस लड़के के साथ हुए काम के बारे में सब कुछ बताती थी। दोस्तों अपनी सहेली की वो बातें सुनकर मेरा मन भी वो सब करने का बहुत करता था और वो बातें सोचकर हर कभी मेरा मन उत्साहित भी हो जाता था, लेकिन मुझे डर भी बहुत लगता था। दोस्तों मुझे आप माफ करना शायद आप लोग अब मेरी यह बातें सुनकर बोर हो रहे होंगे। अब में अपनी आज की उस घटना की तरफ आगे बढ़ती हूँ और उसको सुनाना शुरू करती हूँ।

दोस्तों शिवम मुझे गणित पढ़ाते थे और मैंने कई बार गौर किया था कि वो मेरे बदन को बहुत घूरते हुए देखा करते थे, लेकिन मैंने कभी भी उनके साथ वैसा नहीं सोचा था जो मेरे साथ घटित हुआ। एक बार मुझे शिवम ने एक किताब दे दी और मुझसे कहा कि अंजू तुम इसको अकेले में पढ़ना, किसी को मत बताना, दोस्तों उस दिन में बहुत बेकरार रही और रात को मैंने अपने कमरे में जाकर वो किताब खोली। फिर उसके बाद में बिल्कुल दंग रह गई, क्योंकि दोस्तों उसमे बहुत सारी चुदाई की बिल्कुल नंगी तस्वीरे थी और में वो सब देखकर एकदम लाल हो गई। फिर मैंने वो एक एक तस्वीर बड़े ध्यान से देखी, जिसकी वजह से मेरे पूरे बदन में आग सी लग चुकी थी और में उस जोश की वजह से पागल हुई जा रही थी। फिर इतने में फोन की घंटी बज गई और मैंने फोन उठाकर हैल्लो कहा तो तब मुझे पता चला कि वो शिवम थे और अब वो मुझसे पूछने लगी क्यों अंजू तुम्हे वो किताब कैसी लगी? दोस्तों मेरे तो मुहं से आवाज़ ही नहीं निकल रही थी, इसलिए में एकदम चुप ही रही। अब वो मुझसे कहने लगे कि अंजू तुम बिल्कुल भी घबराओ नहीं, में तुम्हे ऐसे ही मज़े दूँगा, लेकिन तुम किसी को बताना नहीं और उसके बाद मैंने फोन कट कर दिया।

फिर अगले दिन जब में शिवम के पास पढ़ने गई तब में उनसे आँख ही नहीं मिला पा रही थी और वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे। फिर कुछ देर में अपनी पढ़ाई करके वापस अपने घर चली आई। और उसी रात को करीब 12 बजे उनका फोन आया और फिर वो मुझसे पूछने लगे अंजू क्या तूने कभी किसी को चूमा है? तब मैंने तुरंत कहा कि नहीं मैंने ऐसा कभी नहीं किया। फिर वो मुझसे कहने लगे क्या में तुम्हे चूम सकता हूँ? मैंने कहा कि नहीं। अब वो मुझसे आग्रह करने लगे प्लीज एक बार और फिर बोले अच्छा फोन पर तो में तुम्हे चूम ही सकता हूँ और अब वो मुझे मनाने लगे और मेरे सामने गिड़गिड़ाने लगे। फिर कुछ देर बाद मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है आप फोन पर कर लो और उन्होंने तुरंत ही फोन पर मुझे लंबी सी चुम्मी ली, जिसकी वजह से में गरम होने लगी थी और मेरे पूरे बदन में एक अजीब सी सिहरन दौड़ने लगी थी। फिर वो चूमते हुए बोले कि यह वाली तेरे होंठो पर, यह तेरे गोरे गालो पर, यह तेरे बूब्स पर और तेरी पतली कमर पर। दोस्तों में उनके मुहं से यह बात सुनकर जोश में आकर बिल्कुल लाल हो चुकी थी और फिर वो बोले यह तेरी चूत पर, दोस्तों उनके मुहं से चूत शब्द सुनते ही में कांपने लगी थी। अब वो मुझसे कहने लगे अब तू मुझे चूमना शुरू कर।

फिर मैंने ऐसा करने से साफ मना कर दिया, लेकिन वो एक बार फिर से मुझसे ऐसा करने के लिए आग्रह करने लगे। अब मैंने कहा कि हाँ ठीक है, यह लो मैंने भी आपको चूम लिया, तभी वो तड़पते हुए बोले हाए मेरी उर्मिला ( दोस्तों में थोड़ी सी उर्मिला की तरह दिखती हूँ) मेरी जान मज़ा आ गया। में तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ। तुम मुझे बड़ी अच्छी लगती हो। अब वो मुझसे पूछने लगे, यह तुम्हे कहाँ पर मुझे चूमा है? मैंने कहा कि आपके होंठो पर, अब वो मुझसे कहने लगे कि प्लीज मेरे लंड पर भी एक बार चूम लो देखो यह कितना तरस रहा है तेरे होंठो के स्पर्श को महसूस करने के लिए। दोस्तों में तो जैसे उनके मुहं से वो शब्द सुनकर एकदम पागल हो गई, मुझे ऐसा लगा मेरे कानों में जैसे गरम लोहा किसी ने डाल दिया हो और फिर मैंने फोन रख दिया। फिर उसके बाद में कई बार घंटी बजी, लेकिन मैंने नहीं उठाया और उस पूरी रात को में सो ना सकी। फिर अगले दिन मैंने यह सब अपनी सहेली निशा को बताया और वो तो मेरे मुहं से यह पूरी बातें सुनकर मुस्कुराने लगी। फिर वो मुझसे कहने लगी तू कुछ चीज़ ही ऐसी है कि कोई भी तुझे देखकर पागल हो जाए तो उस बैचारे शिवम की उसमे क्या गलती? चल अब तू थोड़ा ध्यान से सुन, वो एक अनुभवी शादीशुदा आदमी है।

अब इसलिए वो तुझे बड़े मस्त मज़े देगा, इसलिए तू एक बार उसके साथ वो सब कर अपनी चुदाई करवाकर देख तो सही, मुझे उम्मीद है कि तू उसके साथ बड़ी खुश होगी। फिर उस दिन में अपनी पढ़ाई करने नहीं गई और उसी रात को करीब 12 बजे एक बार फिर से शिवम का मेरे पास फोन आ गया। अब वो मुझसे फोन पर ही बात करके हुए माफी माँगने लगा और मेरा दिल भी वो सब सुनकर पसीज गया और मैंने उनको कहा कि में आपसे नाराज़ नहीं हूँ। अब वो मुझसे पूछने लगे क्या हम फोन पर तो कर सकते है? और में उसकी वो बात मान गई और फिर उसके बाद उसने मेरे साथ करीब तीस मिनट तक फोन पर सेक्सी बातें की और मुझे ऐसी गंदी गंदी गरम बातें बताई जिसकी वजह से में दो बार झड़ गई और वो तब तक बातें करता रहा, जब तक मैंने उन्हे पांच बार सही में उनके होंठो पर चूमने का वादा नहीं कर दिया। फिर अगले दिन हम दोनों की अच्छी किस्मत से उनकी पत्नी और बच्चे गाँव चले गये, जिसकी वजह से अब वो अपने कमरे में अकले रह गए। फिर उसी रात को उन्होंने मुझे फोन किया और अपने कमरे में आने को कहा, लेकिन में उनकी इस बात को नहीं मानी और मैंने उनको कहा कि अगर तुमने मेरे साथ और कुछ भी किया तो क्या भरोसा?

अब उन्होंने कसम खाई और कहा कि मेरी जान बस में तुम्हे पांच बार चुम्मी करूँगा और उसके अलावा में कुछ नहीं करूंगा और कुछ देर के बाद में मान गई। फिर में अपने कमरे को धीरे से बाहर से बंद करके नीचे वाले कमरे पर उनके कमरे के बाहर आ गई और उसके बाद हल्के से मैंने दरवाजा खोल दिया। अब उन्होंने तुरंत ही मुझे हाथ पकड़कर कमरे के अंदर खींच लिया और मैंने देखा कि कमरे के अंदर बिल्कुल अंधेरा था और उन्होंने झट से दरवाजा अंदर से बंद किया और उसने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया। अब वो मेरे होंठो को चूमने लगा, वो धीरे धीरे प्यार करते हुए मेरे होंठो चूसने लगा और अपनी जीभ से वो मेरे दांतों पर दबाव डाल रहे थे। अब में झट से समझ गई कि वो मेरे मुहं में अपनी जीभ को डालना चाहते थे, लेकिन मुझे अब बहुत शरम आ रही थी और आख़िर मैंने अपना मुहं खोल दिया। अब उनकी जीभ को मेरे मुहं में आ गई और उन्होंने मेरी जीभ को कस लिया और वो उसका मज़ा लेने लगे, जिसकी वजह से में तो पागल सी हो गई, जैसे मुझे जन्नत का मज़ा आ रहा हो। दोस्तों मुझे पहले नहीं पता था कि यह सब करने में इतना मस्त मज़ा भी आता है? और में उनके साथ वो सब करते हुए मन ही मन में सोचने लगी कि जब चूमने में इतना मज़ा है तो वो सब करने में कितना मज़ा आता होगा?

अब वो मुझे मज़े दिए जा रहे थे और फिर मैंने कुछ देर बाद महसूस किया कि अब उनके हाथ मेरी पीठ पर चल रहे थे। फिर उन्होंने मुझे अपनी तरफ लेकर कस लिया, जिसकी वजह से अब में उनसे चिपकी हुई थी और उनका गरम बदन और वो तेज चलती साँसे महसूस कर रही थी। फिर उनका एक हाथ मेरे एक बूब्स पर आकर रुक गया और उसके बाद उनका दूसरा हाथ धीरे से मेरे दूसरे बूब्स पर आ गया। दोस्तों मेरी तो साँसे जैसे रुक ही गई थी, जिसकी वजह से में पूरी तरह से काँप गई और मैंने कसमसाकर उनको अपने बदन से हटाने की नाकाम कोशिश की, लेकिन उन्होंने मुझे कसकर दबोचा हुआ था. इसलिए में अपने उस काम को करने में सफल ना हो सकी। अब मैंने उनको कहा प्लीज़ रुक जाओ प्लीज और वो रुक गए मुझसे पूछने लगे कि क्या हुआ? मैंने कहा कि प्लीज़ आप इन्हे हाथ मत लगाओ, हमारे बीच सिर्फ़ चूमने तक ही ठीक था, लेकिन यह तो बहुत ज़्यादा हो गया है और में यह सब नहीं करूँगी, प्लीज़ अब मुझे जाने दो। अब वो कहने लगे हाँ ठीक है बाबा हमारे बीच चूमने की बात थी तो तुम मुझे पाँच बार चुम्मी तो दो, अभी तो बस एक ही हुई है। अब में नहीं मानी और वो मुझे मनाते ही रहे और करीब दस मिनट तक वो मुझे मनाते रहे और रोने भी लगे।

फिर मुझे कुछ देर के बाद उनके ऊपर तरस आ गया और में सिर्फ़ उनको चार बार चूमने के लिए तैयार हो गई और उन्होंने मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों में ले लिया और वो मेरे ऊपर के होंठो को चूसने लगे। फिर वो मेरे होंठो को करीब तीन चार बार चूसते ही रहे, जिसकी वजह से में बहुत बेताब हो गई। अब उन्होंने मेरे हाथ को पकड़कर अपने कंधे पर रखकर लपेट लिया, जिसकी वजह से मेरे बूब्स उनकी छाती से सट गए थे और फिर उन्होंने अपने दोनों हाथों को मेरी पीठ पर फिराना शुरू कर दिया। फिर इस तरह से करते हुए उन्होंने फिर से मुझे मेरे होंठो को चूमने में उलझा लिया। में गरम होकर उसमे पूरी तरह से खो गई। अब उन्होंने मुझसे कहा कि में दीवार की तरफ मुहं करके खड़ी हो जाऊँ और में वो बात तुरंत मान गई। अब में दीवार की तरफ थी और मेरी पीठ उनकी तरफ थी और फिर उन्होंने मेरी छाती पर हाथ रखकर वो मेरे कान के नीचे अपनी जीभ से चाटने लगे और में एकदम पागल हो गई। मुझे इतना मस्त मज़ा आ रहा था कि में आप सभी को लिखकर बता नहीं सकती। फिर धीरे धीरे उन्होंने मेरी गर्दन पर चूमना शुरू किया, में आहह्ह्ह्ह करने लगी थी और उसी समय उन्होंने मेरे कान में मुझसे कहा कि अंजू मेरी जान तू बहुत नमकीन है। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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दोस्तों में मज़े जोश की वजह से सिर्फ़ शिवा ही कह सकी थी, तभी मैंने महसूस किया कि मेरे दोनों कूल्हों के बीचो बीच उनका वो गरम लोहा लगा हुआ था और में मन ही मन सोचकर अंदाजा लगाने लगी कि वो मेरे पीछे बीना अंडरवियर के ही लगे हुए थे। अब मुझे थोड़ा सा डर भी लगा और अच्छा भी लगने लगा था क्योंकि में उस समय बहुत गरम हो गई थी और अपनी गांड को मैंने उनकी तरफ कर दिया ताकि उनका वो ठीक तरह से सेट हो सके। फिर उनके हाथ अब धीरे से मेरी सलवार के नाड़े पर आ गए और उन्होंने मुझे चूमते हुए ही एक जोरदार झटके से मेरी सलवार को खोल दिया, जिसकी वजह से मेरी सलवार नीचे गिर गई। अब तुरंत ही उन्होंने मेरी पेंटी को भी कसकर पकड़ लिया और अब वो उसको भी उतारने लगे थे। दोस्तों अब मेरी नंगी गांड पर उनका लंड लगा हुआ था और फिर उन्होंने मेरी कमीज़ को ऊपर किया और मैंने भी उनका साथ देते हुए आसानी के लिए अपने दोनों हाथों को ऊपर कर दिया। फिर मेरी कमीज़ को उतारने के बाद उन्होंने पीछे से मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया और एक झटके से मेरी ब्रा को हटाकर दूर फेंक दिया। दोस्तों में तो शरम की वजह से लाल हो गई, क्योंकि उस दिन पहली बार में किसी मर्द के सामने पूरी नंगी हुई थी और वो तो उस कमरे में थोड़ा सा अँधेरा था वरना तो में मर ही जाती।

फिर उन्होंने मेरे पीछे से ही मेरे बूब्स को पकड़ लिया और वो मलने लगे थे। उन्होंने मेरे निप्पल को मसलना शुरू किया। अब में विरोध करने लगी, लेकिन उन्हे कोई भी परवाह नहीं थी, उन्होंने मुझे दीवार के सहारे कसकर दबोचा हुआ था, मेरी गांड पर उनका तनकर खड़ा लंड सटा हुआ था और मेरे दोनों बूब्स उनकी मुठ्ठी में थे। अब वो अपनी उंगली और अंगूठे के बीच मेरे निप्पल को बड़े बेदर्दी की तरह मसल रहे थे, जिसकी वजह से में पागल सी हो गई थी। फिर करीब दस मिनट के बाद उन्होंने मुझे छोड़ा और बेड पर बैठने के लिए कहा और में बैठ गई। उसके बाद उन्होंने बेड के पास रखा लेम्प चालू कर दिया। फिर जैसे ही उसकी रौशनी हुई में अपने नंगे गोरे बदन को छुपाने लगी और एक चादर को खींचकर में अपनी तरफ करने लगी, लेकिन उन्होंने उस चादर को मेरे हाथ से लेकर दूर फेक दिया। अब में एक मजबूर कबूतरी की तरह अपने शिकारी के सामने उसके हाथों में केद थी, इसलिए में कुछ भी नहीं कर सकती थी और वो मुझे लगातार घूरकर ऊपर से नीचे तक निहार रही थी। अब उनका लंबा तना हुआ मोटा लंड मेरी आँखों के सामने था और मैंने शरमाकर अपनी आँखों को बंद कर लिया। फिर उन्होंने मुझसे कहा कि अंजू तुम अपनी आँखों को खोलो और मेरे इसको प्यार करो अपने हाथों में पकड़ो प्लीज़ और उन्होंने इतना कहकर ज़बरदस्ती मेरे हाथों को अपने लंड पर रख दिया।

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अब वो कहने लगे चल साली अब तू इसको अपने मुहं में ले ले मेरी रंडी। दोस्तों उनके मुहं से यह बदले हुए शब्द रंडी को सुनते ही मैंने तुरंत ही अपनी दोनों आँखों को खोल दिया और में गुस्से से उनको देखने लगी। अब वो तुरंत ही समझ गए, वो हंसते हुए कहने लगे कि यार सेक्स में ऐसा होना ही पड़ता है तभी तो असली मज़ा आता है। फिर वो दोबारा मुझसे कहने लगे चल चूस तू इसको चाट कुल्फी की तरह, देखना तुझे बड़ा मस्त मज़ा जाएगा। अब मैंने कहा कि नहीं प्लीज यह सब नहीं और कुछ भी कहोगे में करूँगी, लेकिन मुहं में नहीं ले सकती प्लीज़। अब वो मेरे मुहं से इस बात को सुनकर उदास हो गए और मुझसे कहने लगे कि कोई बात नहीं जान, चल अब तू लेट जा और फिर में लेट गई। दोस्तों वो उस समय खड़े थे और में बेड पर आधी लेटी हुई थी। मेरे दोनों पैर जमीन पर थे और उन्होंने मेरे दोनों पैरों को पकड़कर फेला दिया। अब अपने लंड का टोपा मेरी खुली चूत के मुहं पर रख दिया और वो मुझसे कहने लगे कि अंजू मेरी जान तुम्हे थोड़ा सा दर्द पहली बार जरुर होगा। अब मैंने हाँ में अपना सर हिला दिया और उन्होंने एक झटका दिया, जिसकी वजह से उनका आधा टोपा मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर चला गया।

दोस्तों में दर्द की वजह से चिल्ला उठी और रोने लगी, वो रुक गये और मेरी गांड को उठाकर एक गोल तकिया मेरे कूल्हों के नीचे रख दिया। अब मेरी चूत थोड़ा सा ऊपर हो गई थी, वो मेरे ऊपर झुक गए और मेरे होंठो को अपने मुहं में लेकर अपने लंड का एक ज़ोरदार झटका दे दिया, जिसकी वजह से मुझे बड़ा तेज दर्द हुआ और मेरे मुहं से एक चीख ही निकल गई। अब उन्होंने मेरे होंठो को अपने होंठो से सील करके मेरी आवाज को बंद कर दिया, लेकिन में उस दर्द से करहा रही थी और वो थोड़ा सा रुक गए। दोस्तों मेरी चूत में उनका आधा लंड जा चुका था, करीब दो तीन मिनट के बाद उन्होंने धीरे धीरे अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर करना शुरू किया, लेकिन में अभी भी उस दर्द से मरी जा रही थी। फिर रुककर उन्होंने मुझसे कहा कि साली अगर तू मुहं में ले लेती तो मेरा लंड चिकना हो जाता और तुझे यह इतना दर्द नहीं होता, ले अब तू सूखा लंड ही ले और थोड़ा सा रुककर एक जोरदार झटका दे दिया, जिसकी वजह से सनसनाता हुआ उनका पूरा लंड मेरी चूत की गहराईयों में चला गया। अब वो नहीं रुके और मुझे लगातार धक्के देकर चोदने लगे थे और बिजली की रफ्तार से उनका लंड मेरी चूत के अंदर बाहर आ रहा था और में उस दर्द से तड़प रही थी।

दोस्तों करीब आठ दस मिनट के बाद मुझे भी बड़ा मस्त मज़ा आने लगा था, मैंने अपने दोनों पैरों को उनकी कमर पर रस्सी की तरह कस दिया था और में भी अब अपनी गांड को उठा उठाकर मज़े लेने लगी थी। अब वो मुझसे बोले शाबास मेरी रानी अब तू पूरी तरह से रंडी बन गई है। दोस्तों में इस बीच दो बार झड़ चुकी थी और वो थे कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। फिर करीब बीस मिनट चुदाई करने के बाद, उन्होंने मुझे घोड़ी बन जाने को कहा। अब में उठकर फर्श पर आ गई और उनके सामने घोड़ी की तरह बैठ गई। अब उन्होंने मेरी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपना लंड पीछे से मेरी चूत में डाल दिया, मुझे दोबारा से दर्द होने लगा था, लेकिन उन्होंने मुझे समझाकर कहा कि कुछ देर के बाद में मज़ा आने लगेगा, क्योंकि यह चुदाई करने का सबसे अच्छा मजेदार तरीका है ( दोस्तों वैसे मुझसे मेरी सहेली भी यही कहती थी। ) अब में मान गई और पीछे से धक्का देकर उनका साथ देने लगी कुछ देर बाद मुझे उस दर्द से राहत मिलने लगी और करीब दस मिनट के बाद वो मेरी चूत में झड़ गये। दोस्तों इस तरह से हम दोनों पूरी तरह से वो खेल खेलते हुए थक चुके थे और हम साथ ही लेट गए।

अब उन्होंने मुझे बड़े प्यार से चुम्मा दे दिया। थोड़ी देर के बाद उन्होंने मुझे एक गोली दी और कहा कि तू यह खा ले, इसकी वजह से तू गर्भवती नहीं होगी। अब में समझी कि उन्होंने अपने लंड पर कंडोम क्यों नहीं लगाया था? कुछ देर के बाद उन्होंने मुझे कहा कि अंजू तू क्या और भी मज़ा लेगी और उन्होंने इतना कहकर अपना लंड जो कि एक बार फिर से खड़ा हो गया था मेरे हाथ में दे दिया और कहने लगे प्लीज़ तू इसको प्यार कर। अब मैंने कह कि नहीं यह सब मुझे अच्छा नहीं लगता, आप इसके अलावा कुछ भी कहेंगे में वो सब करने के लिए तैयार हूँ। फिर वो झट से बोल पड़े हाँ ठीक है अब मुझे तुम्हारी गांड चाहिए। दोस्तों में उनके मुहं से यह बात सुनकर डर गई और मैंने मना करते हुए नहीं कहा, लेकिन उन्होंने बिना कुछ सुने तुरंत ही मुझे उल्टा किया और मेरी गांड पर अपना लंड टिका दिया। अब में तुरंत समझ चुकी थी कि अब मुझे अपनी गांड की भी बली देनी ही पड़ेगी। ( दोस्तों मेरी सहेली भी कई बार अपनी गांड मरवा चुकी है, वो कहती है कि कुछ मर्दों की हवस इसी से शांत होती है) अब यह बात मन ही मन सोचकर में मान गई और फिर में सोचने लगी कि जब यह मुझे इतना मज़ा दे चुके है तो क्यों ना में भी इनको अपनी गांड देकर खुश कर दूँ?

मुझे अपनी गांड में लंड को लेने में जो दर्द होगा में उसको भी सहन करने की पूरी पूरी कोशिश करूंगी। अब मैंने यह सभी बातें मन में सोचकर अपनी गांड को उनके लंड की तरफ धकेलकर सेट कर दिया। अब में नीचे अपने पेट के बल उनके सामने लेटी हुई थी और वो मेरे ऊपर लेटे हुए थे, उनका लंड मेरी गांड के मुहं पर टिका हुआ था। फिर उन्होंने दोबारा से दो तकिये लिए और उनको मेरे पेट के नीचे रख दिया, जिसकी वजह से अब मेरी गांड पहले से ज्यादा ऊपर हो चुकी थी। फिर उन्होंने मेरे गांड के छेद पर थूक लगाया और अपने लंड का टोपा टीका दिया उसके बाद एक गहरी तेज साँस ली और धीरे धीरे दबाव बनाते हुए वो अपने लंड को मेरी गांड के अंदर डालने लगे। फिर इतनी मेहनत के बाद मेरी टाईट गांड में उनका टोपा ही अंदर जा सका, लेकिन उस अजीब से दर्द की वजह से मेरे मुहं से अब बड़ी तेज चीख निकलने वाली थी, उसको मैंने अपने अंदर ही दबा लिया। फिर उन्होंने दोबारा थूक लगाया और डालने की कोशिश करने लगे, लेकिन उनका लंड तब भी नहीं गया और मैंने भी उस चीख को बाहर निकलने से रोकने के लिए अपने दांतों से अपने नीचे के होंठो को भीच रखा था। अब उन्होंने मुझे घोड़ी की तरफ बैठा दिया और लेम्प की लाइट को अपनी तरफ कर दिया, जिसकी वजह से अब मेरी गांड का छेद उन्हे साफ नज़र आ रहा था।

अब उन्होंने दोबारा मेरी गांड पर थूक लगाया और लंड को छेद पर टिकाकर मेरी कमर को अपने दोनों हाथों से कसकर पकड़कर बड़ी तेज़ी से धक्का दिया। दोस्तों इस धक्के से उनका आधे से ज़्यादा लंड मेरी गांड के अंदर चला गया था। अब वो नहीं रुके अपने लंड को लगातार अंदर बाहर करते रहे और मेरी आँखों से आंसू निकल रहे थे, लेकिन मुझे मज़ा भी बहुत आने लगा था। फिर करीब दस मिनट के बाद वो रुके और उन्होंने मेरी गांड के अंदर ही अपने वीर्य को निकाल दिया और इस तरह से यह सब करते हुए हमे रात के करीब तीन बज चुके थे। फिर मैंने अपने कपड़े पहने और उसके बाद में अपने कमरे में चली गई। दोस्तों अगले दिन में उस दमदार दर्द वाली चुदाई की वजह से बिस्तर से उठ भी ना सकी और दर्द की वजह से में स्कूल भी नहीं गई और में अपनी तबियत खराब होने का बहाना बनाकर अपने बिस्तर पर ही लेटी रही। फिर उसी रात को करीब 11 बजे उनका मेरे पास फोन आया और वो मुझे दोबारा अपने कमरे में बुलाने लगे। दोस्तों लाख कोशिश करने के बावजूद भी में अपने को रोक नहीं सकी और में उनके कमरे में जा पहुंची और फिर उन्होंने मुझे अपने लंड को चूसने के लिए मना ही लिया। अब में उनके लंड को अपने मुहं में भरकर बड़े मज़े से चूसने लगी थी और उसके बाद वो मेरी जमकर चुदाई करने लगे थे।

दोस्तों यह सब अगले पांच रात तक वैसे ही चलता रहा और उन्होंने मुझे बहुत प्यार किया और हर तरह से हर एक स्टाइल में मुझे जमकर चोदा। दोस्तों उन्होंने मुझे बिस्तर के साथ बाँधकर भी सेक्स किया और जब जिस दिन उनकी पत्नी आ गई और तब जाकर हम दोनों को वो सब रोकना पड़ा। फिर कुछ दिनों के बाद में उन्होंने अपने एक दोस्त के फ्लेट का इंतज़ाम हमारे उस खेल के लिए किया, लेकिन हम दोनों वहां पर बस तीन चार बार ही चुदाई के मज़े ले सके। फिर एक बार उनकी पत्नी को हमारे बीच चल रहे इस खेल के बारे में पता चल गया और वो वहां से कमरा खाली करके दूसरी जगह चले गये उसके बाद हम दोनों के बीच कभी कुछ नहीं हुआ, लेकिन में आज तक उन्हे नहीं भूली, हालाँकि बाद में मेरे दो बॉयफ्रेंड भी बने, लेकिन उन दोनों के साथ चुदाई करने में वो बात नहीं थी जो मुझे अपनी पहली चुदाई और मेरे किराएदार के साथ संतुष्टि मिली। उस मज़े के बारे में सोचकर आज भी मेरा मन खुश हो जाता है। दोस्तों यह थी मेरी पहली चुदाई की एक सच्ची दास्ताँ मुझे उम्मीद है कि सभी पढ़ने वालों को जरुर पसंद आएगी ।।

धन्यवाद …

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